अब के ये रैना गुजरें नहीं है
खाक ऐसी याद कि बदरे हुई है
कोई उन्हें कहे यादों को न भेजे हमे
गुस्ताख होती है ये बेचैन करे हमें
ये जो आये तो नींद को निगले है
खाक ऐसी याद कि बदरे हुई है
इनके सताए जो, तकदीर के आतीत बने है
गिरफ्त से छूटे जो, मौजों के मौला बने है
आना-जाना इनका, जीवन को कतरे है
खाक ऐसी याद कि बदरे हुई है
सैनपाल 'साथी'
Sunday, October 25, 2009
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बहुत बढिया शैली पसंद आई,आगे भी लिखे,
ReplyDeleteआप का स्वागत करते हुए मैं बहुत ही गौरवान्वित हूँ कि आपने ब्लॉग जगत में पदार्पण किया है. आप ब्लॉग जगत को अपने सार्थक लेखन कार्य से आलोकित करेंगे. इसी आशा के साथ आपको बधाई.
ब्लॉग जगत में आपका स्वागत हैं,
http://lalitdotcom.blogspot.com
blog jagat me swagat aur shubhkamnaye
ReplyDeleteaap ne to gajab kar diya.narayan narayan
ReplyDeleteबहुत अच्छा लेख है। ब्लाग जगत मैं स्वागतम्।
ReplyDeleteअच्छा लिखा और अच्छा लिख सकते है ।
ReplyDeleteशुभकामनाएं ।