है किसने हम पे एहसान-ए-करम फरमाए
एक कमसिन शोख हसीना से टकरा गयी निगाहे
वाजिब न हुस्न जैसे शबाबे- धुमार क्या कहिये
तक़दीर कहू या खुदा मेहरबान वो पहलू में आये
चुनरी लहराई तो हवा ने सिख ली वो अदा
चोटी लहरे तो नागिन ने ले ली वो बलाए
आंखे ऐसी कोई अफसाना बेताब कहे
नजरें ऐसी दिल का हर चिलामन जला दे
वाकिफ है इशारत-ओ-सुए-हम खुद-ब-खुद संभालिए
वरना पता चलेगा हम तो बेमौत मारे गए
सैनपाल 'साथी'
Sunday, October 25, 2009
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment