Sunday, October 25, 2009

मिट गया है...

मिट गया है घाव पर जख्म अभी बाकि है
टूट गए है सब रिश्तें दोस्त रहा साकी है

छोड़ दिया था जिस मोड़ पर सब ने न रहा साथी था
होश कहाँ है दिन चले की रात अभी तक बाकि है

जिनके खातिर हमने सब कुछ का दाव लगाया था
हार गए है हम वो बाजी, ये खलिश अभी तक बाकि है

सैनपाल 'साथी'

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