उल्फत तो है उनसे मगर वो मकाम चाहिए
जब जब खुले आंख तो वो सामने नजर आए
वो उनका तसव्वुर में सताना ख्वाबों के अरमां हो जाए
ए काश कि हर वो ख्वाब हकीकत में ढल जाए
जहाँ जाती है वो महफिलें जवां होती है
ए काश कि वो अहले करम हम पे भी हो जाए
उनकी याद में हम दिल का चैन खो दिए
अब वो ऐसी सदा दे कि दिल को सुकून मिल जाए
जब वो इतराके नाजें कदम चलतें गए
ज़माने के साथ साथ हमे भी दीवाना बनाते गए
जब वो सवरतें थे आइना भी झुका देखे है
ए काश वो हमपे भी एक नजर वारी हो जाए
या रब मेरी इस तड़पन पर उनका आना मरहम हो जाए
वरना इल्जाम तुझे भी देंगे कि उनको ये अंदाज दिए
सैनपाल 'साथी'
Sunday, October 25, 2009
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