बरसो गुजर गए जब तुम हमे मिले थे
क्या हम याद करे की सौ सौ गुल खिले थे
उमड़ आई थी तमन्ना मोहबतें फ़ना हो गयी
हम अभी तक समजे नहीं है क्या बात थी हुई
न हालत न बात न वक़्त अब रहा है वही
तो मै कैसे यकीं करू की तुम हो थमी वही
यादों से परदे उठा कर तुम देखती तो होगी कही
कोई तिनका तेरे पहचान का उडा हवा में तो नहीं
क्यूँ तुम भुलाते नहीं 'साथी' वो मंजरें हिज्र
वक़्त कभी मुट्ठी में पकड़ सका है कोई
सैनपाल 'साथी'
Friday, October 23, 2009
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